आइये, महिला दिवस पर महिलाओं को सशक्त करने के लिए प्ररित करे – विक्रम बिसयार

  • मैं आत्मनिर्भर बनुँगी।
  • मैं खुद के कमाने पर विश्वास रखूंगी और अपने से कम आय/बेरोजगार/कम शिक्षित, पुरुष से भी विवाह करने में कभी कोई हिचकिचाहट नही करुँगी।
  • अगर कोई समझाईश देगा, तो में उस पर खुले दिल से विचार कर, उस पर उचित कार्य करूँगी ।
  • मैं हर उस तरह की आरक्षित सुविधा का त्याग करुँगी, जिसे मैं खुद करने में सक्षम हूँ।
  • जेल में बंद खूंखार महिला अपराधियों के लिए भी फांसी की मांग करुँगी।
  • मैं किसी भी चीज़ के लिए लिंग के आघार पर अधिकार नहीं मांगूगी। मैं उसे अपने सामर्थ्य तथा संघर्ष करके प्राप्त करने की कोशिश करुँगी।
  • मैं किसी भी अपराध का हिस्सा नही बनुँगी।
  • मैं कभी किसी भ्रष्टाचार का हिस्सा नही बनुँगी तथा उससे अर्जित सुख सुविधा का त्याग करूँगी।
  • सरकार से, कानूनो और योजनाओं मे लिंग भेद को समाप्त करने की मांग करुँगी।
  • पुरुषों के विरुद्ध नहीं, साथ खड़ी रहके परिवार, समाज, देश की प्रगति में सहायक बनुँगी।
  • मैं स्पेशल हूँ वाला भाव त्याग कर, लिंग के आधार पर मिलने वाली सारी सुविधायो का त्याग करूँगी तथा दूसरों को भी करने के लिए प्रारित करूंगी।
  • अगर कोई मेरे लिए सीट छोड़ेगा तो उससे मैं वरिष्ठ नागरिकों, शारीरिक और चिकित्सकीय चुनौती वाले व्यक्तियों के लिए करने को प्रारित करूँगी और कहूँगी कि मैं सक्षम हूँ।
  • मैं कभी झूठे आरोप लगा कर, अपने कार्य सिद्ध नही करूंगी।
  • मैं अपने अधिकारो के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी घ्यान रखूंगी।
  • मैं अपने कर्मों के आधार पर समाज में समान प्राप्त करूँगी।
  • मैं किसी महिला की कोई बुराई नहीं करुँगी।
  • मैं कभी किसी भी महिला के प्रति ईर्ष्या, दुर्भावना नही रखूंगी।

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